कोयंबटूर पुलिस पर आरोप: मानवाधिकार उल्लंघन और विवादों की पड़ताल
तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर की पुलिस हाल के वर्षों में कई गंभीर आरोपों और विवादों के केंद्र में रही है। इन घटनाओं ने न केवल स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा किया है, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। इस लेख में, हम कोयंबटूर पुलिस से जुड़े प्रमुख मामलों और उन पर लगे आरोपों की विस्तृत समीक्षा करेंगे।
अवैध हिरासत और प्रताड़ना के आरोप
जयकुमार का मामला
सितंबर 2023 में, कोयंबटूर की निवासी धनलक्ष्मी ने पुलिस आयुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि उनके 22 वर्षीय बेटे, आर. जयकुमार, को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लिया और प्रताड़ित किया। धनलक्ष्मी के अनुसार, 16 सितंबर को पुलिस ने जयकुमार को दो लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में हिरासत में लिया था। हिरासत के दौरान, जयकुमार को लोहे की पाइप से पीटा गया, जिससे उसकी किडनी खराब हो गई और उसे डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी। धनलक्ष्मी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके बेटे को कई स्थानों पर ले जाकर शारीरिक यातनाएं दीं, जिसके परिणामस्वरूप उसकी सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हुई। पुलिस आयुक्त वी. बालाकृष्णन ने मामले की जांच के लिए सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया।
किशोर की पिटाई का मामला
अगस्त 2020 में, तमिलनाडु राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) ने कोयंबटूर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया, जिसमें एक कांस्टेबल द्वारा लॉकडाउन के दौरान एक किशोर की पिटाई के मामले में तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई। आरोप था कि कांस्टेबल दुर्गाराज ने लॉकडाउन के दौरान घूम रहे 13 वर्षीय लड़के को रोकने के बाद लाठी से पीटा, जिससे उसके पैरों, जांघों और घुटनों पर गंभीर चोटें आईं। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, कांस्टेबल को नियंत्रण कक्ष में स्थानांतरित कर दिया गया और विभागीय जांच शुरू की गई।
पुलिस अधिकारियों के आंतरिक विवाद
डीआईजी सी. विजयकुमार की आत्महत्या
जुलाई 2023 में, कोयंबटूर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सी. विजयकुमार ने अपने कैंप कार्यालय में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, विजयकुमार ओसीडी और अवसाद से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, उनके दोस्तों और सहकर्मियों ने इस दावे को खारिज किया, उन्हें एक सकारात्मक और दयालु व्यक्ति के रूप में याद किया। इस घटना ने तमिलनाडु पुलिस विभाग में आंतरिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पुलिस और नागरिकों के बीच टकराव
महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी
जुलाई 2023 में, मदुरै की दो महिला वकील और कार्यकर्ता, नंदिनी और निरंजना, को कोयंबटूर में पुलिस पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। वे आरएसएस को ऊटी के एक स्कूल में बैठक आयोजित करने की अनुमति देने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने जा रही थीं। पुलिस ने उन्हें सुलूर क्षेत्र में हिरासत में लिया, जहां उन्होंने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और एक कांस्टेबल पर हमला किया। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
सड़क पार कर रहे युवक की पिटाई
जनवरी 2025 में, एक पुलिस हेड कांस्टेबल, जयप्रकाश, का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह सड़क पार कर रहे एक युवक, मोहम्मदराज, को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे थे। यह घटना नल्लम्पलयम-संगनोर रोड पर हुई, जब मोहम्मदराज मोबाइल फोन देखते हुए सड़क पार कर रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और जयप्रकाश के खिलाफ जांच के आदेश दिए।
निष्कर्ष
उपरोक्त घटनाएं कोयंबटूर पुलिस विभाग में व्याप्त चुनौतियों और विवादों की ओर संकेत करती हैं। अवैध हिरासत, प्रताड़ना, आंतरिक तनाव और नागरिकों के साथ टकराव जैसे मामलों ने पुलिस की छवि को धूमिल किया है। यह आवश्यक है कि पुलिस विभाग अपने अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और आचरण पर विशेष ध्यान दे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और जनता का विश्वास बहाल हो सके।
