तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले में शनिवार सुबह श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग परियोजना का एक हिस्सा ढह गया, जिससे आठ मजदूर फंस गए। यह हादसा सुरंग के प्रवेश बिंदु से लगभग 14 किलोमीटर अंदर हुआ। सुरंग की छत का लगभग तीन मीटर हिस्सा ढहने से यह दुर्घटना घटी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना के समय लगभग 50 मजदूर साइट पर कार्यरत थे, जिनमें से 42 सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि आठ मजदूर अंदर फंसे रह गए।
फंसे हुए मजदूरों में दो इंजीनियर, दो मशीन ऑपरेटर और चार अन्य श्रमिक शामिल हैं। इनमें से एक इंजीनियर उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के निवासी श्रीनिवास हैं, जो 2008 से हैदराबाद में जेपी कंपनी में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। अन्य फंसे हुए मजदूरों में पंजाब के गुरप्रीत सिंह भी शामिल हैं, जो 20 दिन पहले ही अपने घर से काम पर लौटे थे।
हादसे के तुरंत बाद, बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। सिंचाई परियोजना का काम करने वाली कंपनी की दो रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके साथ ही, भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की सहायता भी मांगी गई है। बचाव कार्य में पानी और कीचड़ की मौजूदगी के कारण कठिनाइयां आ रही हैं, जिससे फंसे हुए मजदूरों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से फोन पर बातचीत की और स्थिति का जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अग्निशमन विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
यह परियोजना, जिसे अलीमिनेती माधव रेड्डी परियोजना के नाम से भी जाना जाता है, का उद्देश्य श्रीशैलम परियोजना के बैकवाटर से नलगोंडा जिले को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराना है। इस परियोजना की शुरुआत 2006 में संयुक्त आंध्र प्रदेश सरकार के तहत हुई थी, और इसे दिसंबर 2010 तक पूरा करने का लक्ष्य था। हालांकि, विभिन्न कारणों से परियोजना में देरी हुई, और चार दिन पहले ही इसका काम फिर से शुरू किया गया था।
इस हादसे ने परियोजना की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ठेकेदारों से मिलीभगत और खराब गुणवत्ता के काम के कारण इस तरह की दुर्घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से इस हादसे की पूरी जिम्मेदारी लेने की मांग की है।
बचाव कार्य में जुटी टीमों को सुरंग में भरे पानी और कीचड़ के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एनडीआरएफ की टीमें पैदल ही उस बिंदु तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जहां सुरंग की छत धंसी है। सुरंग खोदने वाली मशीन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे बचाव कार्य में और भी चुनौतियां आ रही हैं।
इस घटना ने सुरंग निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों और निगरानी की आवश्यकता को उजागर किया है। सरकार और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे इस घटना की गहन जांच करें और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। फिलहाल, सभी की निगाहें बचाव कार्य पर टिकी हैं, और सभी प्रार्थना कर रहे हैं कि फंसे हुए मजदूर सुरक्षित बाहर निकल आएं।


















